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Judicial Order : झारखंड हाईकोर्ट ने जल संसाधन विभाग के चार बड़े अधिकारियों पर लगाया भारी जुर्माना

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News India Live, Digital Desk: न्याय में देरी को लेकर अक्सर अदालतों पर सवाल उठाए जाते हैं, लेकिन झारखंड से एक ऐसा मामला सामने आया है जो यह दिखाता है कि जब सरकारी अफसर कोर्ट के आदेशों को गंभीरता से नहीं लेते, तो अदालतें कितना सख्त रुख अपना सकती हैं। झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए राज्य के जल संसाधन विभाग के चार वरिष्ठ अधिकारियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना ठोक दिया है।क्या है पूरा मामला?यह मामला जल संसाधन विभाग से सेवानिवृत्त हुए एक कर्मचारी, नागेंद्र राम के बकाये के भुगतान से जुड़ा है। नागेंद्र राम को रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले वित्तीय लाभ नहीं दिए जा रहे थे, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने सुनवाई के बाद विभाग को आदेश दिया था कि प्रार्थी के सभी बकायों का भुगतान जल्द से जल्द किया जाए।लेकिन अधिकारियों ने इस आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया और महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं की। जब नागेंद्र राम को उनका पैसा नहीं मिला, तो उन्होंने दोबारा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अधिकारियों के खिलाफ 'अवमानना' का मामला दायर कर दिया।हाईकोर्ट ने लगाई फटकारइस मामले की सुनवाई जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत में हुई। जब कोर्ट ने पाया कि उसके स्पष्ट आदेश के बावजूद अधिकारियों ने भुगतान में जानबूझकर देरी की है, तो कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने इसे न्याय प्रक्रिया का अपमान माना।किन-किन अधिकारियों पर लगा जुर्माना?कोर्ट ने इस लापरवाही के लिए चार अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया और उन पर 25-25 हजार रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया। इन अधिकारियों में शामिल हैं:जल संसाधन विभाग के तत्कालीन सचिव प्रशांत कुमारवित्त विभाग के तत्कालीन संयुक्त सचिव राकेश रंजनजल संसाधन विभाग के अवर सचिव विश्वनाथ सिंह मुंडाजमशेदपुर के गंगा नहर डिवीजन के कार्यपालक अभियंता अभय कुमार पिंगुआकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा है कि अगर ये अधिकारी जुर्माने की राशि नहीं भरते हैं, तो उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह फैसला उन सभी सरकारी अधिकारियों के लिए एक बड़ा सबक है जो सोचते हैं कि वे अदालती आदेशों को हल्के में ले सकते हैं।
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